Bookmark and Share डिजिटल भुगतान से वैश्यावृत्ति के व्यापार में कमी के आंकड़ों से बौखलाये ,मोदी के दूत रविशंकर प्रसाद                मंत्री है या भ्रष्टाचारियों के दलाल                 मोदी के राज में पत्रकारों की आवाज की जा रही बंद, फिर भी चाटुकार बजा रहे बीन                एस्सार समूह ने केंद्रीय मंत्रियों और अंबानी बंधुओं के फोन टैप कराए                1500 करोड़ का घोटाला, राजभवन ने नहीं की कार्यवाही                फर्जी डाक्टरों का सरगना डॉ.अभिमन्यु सिंह                मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं भ्रष्टाचारियों के सरगना कहिए !                पद़माकर त्रिपाठी को डॉ. नही सफेद एप्रिन का गिद्ध कहिए !                    
शिवराज की मण्डली में हैं अनुराग जैन जैसे भ्रष्ट अधिकारी





जिला भोपाल के पूर्व कलेक्टर रह चुके अनुराग जैन जो वर्तमान में मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव के पद पर कार्यरत हैं एवं मुख्यमंत्री श्री चौहान के दूसरे कार्यकाल में भी भ्रष्ट दल में शामिल हैं। अनुराग जैन इनके जिला भोपाल के कलेक्टर कार्यकाल में लोकायुक्त में इनके विरूद्ध मध्यप्रदेश लोकायुक्त में अधिनियम 1981 की धारा 12 (१) में मामला दर्ज किया गया । इनके कार्यकाल में सुश्री शाहिदा सुल्तान के परिवहन विभाग के निरीक्षक के पद पर रहते हुए भोपाल रेल्वे स्टेशन पर 7-8/5-97 की रात्रि को विशेष पुलिस स्थापना द्वारा काफी यात्रा में 6,03,600/- की रकम सूटकेस में ले जाते हुए पकडी थी एवं सुश्री शाहिदा सुल्तान को इतनी बडी रकम कहां से प्राप्त हुई बताने में असफल रही इसलिए लोकायुक्त पुलिस द्वारा आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के पश्चात प्रस्तावों को राज्य सरकार के पास अभियोजन की स्वीकृति के लिए भेजा गया था,सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी प्राप्त करने के पश्चात दिनांक 20-05-98 को विशेष न्यायाधीश भोपाल के न्यायालय में चालान पेश किया गया था । जब इस प्रकरण का विचारण प्रगति पर था तब जिला कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अनुराग जैन ने मेमो दिनांक 210 जे.सी.-1/2002 दिनांक 15 मार्च 2002 को विशेष पुलिस स्थापना के विशेष लोक अभियोजक को एक मेमो भेजा था, जिसमें कहा गया था कि विशेष न्यायाधीश भोपाल के न्यायालय से विशेष प्रकरण क्रमांक 8/98 भृष्टाचार उन्मूलन की धारा 13 (१) (३) और (२) के अधीन राज्य विरूद्ध शाहिदा सुल्तान और अन्य वापस होने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाय सब इस मामले को लोकायुक्त ने राज्य जानकारी में यह तथ्य लाया गया कि प्रत्याहरण का आदेश संबंधित विभाग के सामथ्र्य में नही था और प्रत्याहरण आवेदन अप्राधिकृण जाने पर विधि विभाग ने एन.सी. जैन को विशेष लोक अभियोजन पद से हटा दिया एवं विवादित प्रत्याहरण आदेश को वापस ले लिया । इस प्रकरण की जांच करते समय पाया गया कि प्रश्रगत प्रकरण को प्रत्याहरण करने में विशेष लोक अभियोजक पी.सी. जैन को निर्देशित करने में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अनुराग जैन ने उनके सामर्थ से परे कृत्य किया जबकि मध्यप्रदेश विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1947 की धारा 4 (१) द्वारा उपबंधित अनुसार विशेष पुलिस स्थापना का पर्यवेक्षण और नियंत्रण में रहता है । अनुराग जैन से इस प्रकरण में आपत्तिजनक कार्यवाही को स्पष्ट करने और ओ.एस.डी. केा संबोधित डी.ओ. पत्र दिनांक 15-04-2002 को उन्होंने यह स्पष्ट किया कि विशेष लोक अभियोजक भेजा गया पत्र विधि विभाग के निर्देश पर भेजा गया था । जैन के स्पष्टीकरण की जांच करने पर यह पाया गया कि विधि विभाग के तथा कथित अनुदेश कारवार नियमों के नियम 46 के उपनियम (२१) से संलग्र परन्तुक के आधार पर विधि विभाग के सामथ्र्य से परे था एवं जैन को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सावधानी बरतनी चाहिए थी क्या जैन विधि विभाग के मेेन्युअल 30 के अंतर्गत नियमों का प्रयोग करने में लोकायुक्त के प्रस्ताव पर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त विशेष लोक अभियोजक को निर्देश जारी कर सकते थे । दिर्नाक 24-08-2002 को अनुराग जैन को कारण बताओं सूचना जारी करने के बाद उनसे सूचना में पूछा गया कि मध्यप्रदेश लोकायुक्त और उपलोकायुक्त अधिनियम 1981 की धारा १२(१) के अधीन अनुशंसा सक्षम प्राधिकारी के पास उनके विभाग अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ न की जाये इसके बाद भी अनुराग जैन द्वारा कोई जवाब प्रकरण नही किया गया । लोक अभियोजकों के विधि विभाग के अध्याय एक के नियम 15 के अधीन नियुक्त किया जाता है और इस नियुक्ति के समय सरकार जिला मजिस्ट्रेट से अनुशंसा की मांग करती है जो जिला एवं सत्र न्यायाधीश पे विचार विमर्श करने पर फिर अपनी राय जिला एवं सत्र न्यायाधीश की राय के साथ सरकार को प्रस्तुत करना मेन्युअल के नियम 30 के अधीन उसमें निहित उसके पूर्व विवेकाधिकार का प्रयोगकर प्रकरणों को संचालित करने के लिए निजी विधिअभ्यासी को संलग्र करने के लिए सरकार को रोका नही जा सकता । इस शक्ति का प्रयोग करते हुए लोकायुक्त की अनुशंसा पर सरकार में एक निजी विधि लोकअभियोजक एन.सी. जैन को विनिर्दिष्ट मामलों को संचालित करने के लिए नियुक्त किया गया था । जिसमें सुश्री शाहिदा सुल्तान के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण क्रमांक 8/98 सम्मिलित है आपराधिक मामलों में जिला मजिस्टे्रट की भूमिका विधि विभाग के मेन्युअल के नियम 25 तक सीमित होती है । यह नियम जिला मजिस्टे्रट को प्राधिकृत करता है वह लोक अभियोजकों, सहायक लोक अभियोजकों को प्रकरण आवंटित करता है, जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत अनुदेश उन मामलों के संबंध में जारी करने के लिए सशक्त है जिन्हें उनके द्वारा किसी लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक को आवंटित किये गये है । श्री एन.सी.जैन को ना तो जिला मजिस्टे्रट श्री अनुराग जैन की अनुशंसा पर नियुक्त किया गया था और ना ही उन्हें संलग्र किया गया था और ना ही एन.सी. जैन जिला मजिस्टे्रट के प्राधिकार या निर्देश ेक अधीन कार्य करते थे । प्रकरण 8/98 कभी भी जिला मजिस्टे्रट श्री एन.सी.जैन से निम्र के लोक अधिकारी को आवंटित नही किया गया था । श्री अनुराग जैन को विशेष पुलिस स्थापना की विशेष लोक अभियोजक को किसी भी भय में कोई आदेश जारी करने कोई अधिकार नही था । लोकायुक्त की सलाह पर राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया गया था ऐसा करते हुए श्री अनुराग जैन ने न केवल स्वयं की शक्तियों के ज्ञान की कमी का प्रदर्शन किया एवं लोकायुक्त की शक्तियों अधिकारों का हनन किया जो कि एक कानूनी प्राधिकारी है एवं श्री अनुराग जैन ने जिला मजिस्टे्रट पदका दुरूपयोग का उक्त प्रकरण में अभियुक्त व्यक्तियों को अनुचित पद के लिए लोक सेवक के रूप में पद का दुरूपयोग किया । लोकायुक्त द्वारा जारी किया गया कारण बताओं सूचना में स्पष्ट रूप से श्री अनुराग जैन इस प्रकरण में अभियुक्त को किसी भी प्रकार से बचाना चाहते थे । लोकायुक्त मध्यप्रदेश ने दिनांक 24-08-2002 को इस प्रकरण में कारण बताओं सूचना जारी किया गया जिसका जबाव देने में भी श्री अनुराग जैन असफल रहे । तत्कालीन समय में यह प्रकरण खूब सुर्खियों में रहा है। जिसमे लोकायुक्त द्वारा अनुराग जैन को दोषी सिद्ध करार करते हुए दण्डित करने की अनुशंसा की गई है।


Email (With coma separated ) :
You can Advertisment here
संपर्क करें      मेम्बेर्स      आपके सुझाव      हमारे बारे मे     अन्य प्रकाशन
Copyright © 2009-14 Swarajya News, Bhopal. Service and Private Policy