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नर्मदा घाटी भ्रष्टाचार विकास प्राधिकरण रूपए 178 करोड के ठेके में समय विस्तार व महंगाई का लाभ

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के मुख्य अभियंता इंदिरा सागर बांध की नहरों के निर्माण के कार्य हेतु यह कार्यालय पिछले 30 वर्षो से ज्यादा समय से कार्यरत है । जहंा पूर्व मुख्य अभियंता रघुवंशी के सेवानिवृत्ति के साथ ही पहले से चल रहा भ्रष्टाचार न केवल कई गुना ज्यादा हो गया, वरन कार्य और निर्माण की प्रगति उससे दुगनी गति से मंद या कहिये बंद सी हो गई । दोनो ही बडे और महाभ्रष्ट ठेकेदार कर्णसिंग और बी.सी. बिहानी द्वारा इंदिरा सागर, नहरों में अधिकांश कार्य न केवल इनके पास ही है क्योंकि इन हरामखोर जालसाजों द्वारा सुपरवाइजर से लेकर मुख्य अभियंता अध्यक्ष से लेकर मंत्री और मुख्यमंत्री तक को ये धूर्तो का गिरोह जेब में रखकर चलता है । इन जालसाजों ने अधिकांश ठेकों को हथिया तो लिया पर एक तरफ भी काम पूरा न होने के कारण अधिकांश अधिकांश भुगतान अटक गए तो दूसरी तरफ बैंकों से लिया गया ऋण, नगद साख भी चुक गई तो कार्यशील पूंजी के अभाव में दोनों ही जालसाजों के यहां के इंजीनियरों और कर्मचारियों को महीनों से पूरा वेतन नही मिल पा रहा है । तो कार्य क्या खाक करेंगे ? दूसरी तरफ ओंकारेश्वर की बांयी तट नहर का वृहत स्तर का रूपए 178 करोड का जो ठेका सोम के साझेदार करणसिंग ने ठेका लिया था वह भी अब रूपए 204 करोड का हो गया । साथ ही अक्टूबर 06 में यह ठेका 2वर्ष में पूरी नहर निर्माण 5 वर्ष की गारंटी के साथ दिया गया था । इसके विपरीत नवम्बर 08 गुजर जाने के बाद भी ओंकारेश्वर नहरों का निर्माण 40 प्रतिशत अधूरा है । बेशक इसके पीछे कुछ कर्णसिंग की मजबूरियां थी तो कुछ अधिकांश जालसाजियां । सोम के इस साझेदार कर्णसिंग ने एक तो न.घा. भ्रष्टाचार विकास प्राधिकरण के सेवानिवृत्त हुए इंजीनियरों जिसमें आर.पी.सक्सेना व अन्य कईयों को अपने ही यहां नौकरियों पर रख लिया दूसरा काम भी गुणवत्ता की तो छोड औपचारिकता का भी पूर्ण जानबूझकर इसलिए नही करवाया गया ताकि समय विस्तार लेकर यह दो वर्ष का कार्य 4 वर्ष में भी पूरा करने की नियत नही है । क्योंकि अनुबंध के 5 वर्ष का समय जिसमें रख रखाव का कार्य भी ठेकेदार को ही करना था । पूरा करने और अधिकांश बिल का पैसा हजम करने की नियत है । यदि समय विस्तार दिया गया तो महंगाई का भुगतान भी करना पडेगा, अब जबकि अनुबंध में निर्माण कार्य पूर्ण करने का समय पूरा हो चुका है । कार्य पूरा नहीं हुआ है । अब जबकि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण मुख्यमंत्री के पास है, सबसे पहले ठेका निरस्त किया जाना चाहिए, सुरक्षा निधि जब्त कर जहंा,कर्णसिंग के स्वयं के ठेके चल रहे है तत्काल सारे बिलों का भुगतान रोक आंकारेश्वर बायी तट नहर के नुकसान का आंकलन कर सोम और कर्मसिंग पर दंड ठोका जाना चाहिए, साथ ही जो गुणवत्ताहीन कार्य किया जाना है । अधिकांश बिलिंग जो की गई है, वह सैद्धांतिक गुणवत्तायुक्त कार्य की की गई है परंतु जहंा खुदाई में मिट्टी, मुरम या हल्की चट्टानों की खुदाई गई है । यदि कठोर चट्टानें निकली थी तो उनके चट्टे कहंा बना कर मंडारित की गई है । यह बताया जाए ? जहंा नहरों की भराई को परा, पीली मिट्टी से 1-1 की परत बिछाकर मशीनों से पानी डालकर दबाई जाकर भराई करना थी वहा विशुद्ध काली कपासी मुरमुरी मिट्टी से भरकर उस पर सीमेंट की दर सेमी की परत के स्थान पर 6.5 सेमी लेकर 7, 7.5 सेमी की क्रांकीट की गई है । जो नहर के चलने और पानी के दबाव से 3 से 6 माह में फट जाने की पूरी संभावना है । पर इस जालसाज हरामखोर जिसमें खासतौर इंग्ले जो अब वही अधीक्षण यंत्री बन गया है राठी उस वक्त का अधीक्षण यंत्री अब धूर्त चौरसिया है अधीक्षण यंत्री से लेकर मुख्य अभियंता उस समय रघुवंशी बाद में राठौर और अब एम.एल. गुप्ता है । को पर्याप्त महीना बांटकर ताले रखे थे और है । इसलिए समय माया की इन सच्चाईयों को चित्र सहित छापने के बाद भी किसी भी नीचे से लेकर उपर तक किसी भी भ्रष्ट ने कोई कार्यवाही नही की है । शिकायतों को लेकर मुख्य तकनीकी परीक्षक तिवारी व अन्य लोगों की टीम 18-12-08 को भी पहुंची थी, मोटे भ्रष्टों ने कुछ टुकडे इनको भी उछाल दिए और सब ठीक हो गया। इससे जुडी इंदिरा सागर नहरो के सनावद मुख्य अभियंता कार्यालय में इंदिरा सागर नहरों के साथ संभाग 8 में ओंकारेश्वर नहरों का भी कुछ हिस्सा शामिल किया गया, कां.अं. आरघ अपने संभाग में 5 वर्षाे से ज्यादा समय से अपने भ्रष्टाचार, लूटों और लुटाओं के दम पर जमे हुए है । इनके अंतर्गत बिहानी और कर्णसिंगके अधिकांश ठेकोंके कार्य अधूरे है । सही मायनों में ये इन ठेकेदारों की कठपुतली बन उनके फायदे के कार्यो को करने में तल्लीन रहते है । इस का.अ. आरघ ने करोडो रूपए की भ्रष्टाचार से कमाई की है यही अभियंता विधायकों, सांसद, पत्रकारों,अपने वरिष्ठ अभियंताओं से लेकर अध्यक्ष और मंत्री तक को खुश रखता है । ओंकारेश्वर नहरों का कार्य चूंकि अब मुख्य अभियंता इंदौर के क्षेत्र में आ गया है । जिससे नर्मदा घाटी भ्रष्टाचार विकास प्राधिकरण के इंदौर और खेडी के अधीक्षण यंत्री कार्यालय में कुछ रौनक भी भ्रष्टाचार के धन से आ गई है । सबसे महत्वपूर्ण तथ्य नर्मदा घाटी भ्रष्टाचार विकास प्राधिकरण की सभी नर्मदा परियोजनाओं में उपर से लकर नीचे तक जितने भी इंजीनियरों, ठेकेदारों से लेकर मंत्री, मंत्री सब मिलकर 50 प्रतिशत शुद्ध रूप से डकारने में लगे है इसलिए कोई भी कार्य नह तो गुणवत्ता पूर्ण, स्तर और चित्रांकन के हिसाब से हुआ न ही कोई भी कार्य समय पर पूरा हुआ । अन्यथा 23-10-08 को जब इसका उद्घाटन इंदिरा गांधी ने किया था तब पूरी पूर्वी-पश्चिमी निमाड अर्थात खंडवा खरगोन, बडवानी का अधिकांश कृषि क्षेत्र को सिंचित होकर 12 माह फसल पैदा करने वाला बनकर दूसरा पंजाब, हरियाणा बन जाना था, पर यहां तो भ्रष्टाचार के चलते कोई भी कार्य समय पर पूरा नही हो सका ।


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