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फर्जी जाति प्रमाणपत्रों के बल पर नौकरी पाने वालों की बल्ले-बल्ले

उज्जैन। मध्यप्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी पाना आम बात है ऐसे में उज्जैन संभाग कहां पीछे रहने वाला है। यहां पर भी अधिकतर अनुसूचित जाति के लोग ऐसे हैं जिन्होंने नौकरी पाने के लिए अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है। ईसाई समाज के लोग स्वयं को आदिवासी बताकर नौकरी पा रहे हैं। जाली प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाने वालों की भीड़ में छोटे पदों से लेकर बड़ों पर बैठे वरिष्ठï अधिकारी तक शामिल हैं। गौरतलब है उज्जैन संभाग में बहुत पहले से फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी पाने का गोरखधंधा चल रहा है। तथा पूर्व में कई बार इस जाली कारनामों की जांच भी हुई है लेकिन ऊंचे पद पर आसीन भ्रष्टï अधिकारियों ने लाखों की रिश्वत हड़प कर फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारकों का रास्ता साफ कर दिया है। अभी पिछले समय ही एक पुलिस वाले की लड़की तरुणा भारद्वाज सामान्य राजपूत जाति की होने के बावजूद फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे उपनिरीक्षक की नौकरी हथियाई थी। इस बात की शिकायत पुलिस विभाग में की गई। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। छोटे तो छोटे बड़े पदों पर भी कई झूठे जाली प्रमाणपत्रों के बल पर चांदी काट रहे हैं। राज्य में ऐसे अनेक भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भी हैं जिनकें जाति प्रमाणपत्र झूठे् हैं इसमें एक नाम वीरेन्द्र बाथम का भी है। जो छतरपुर कलेक्टर से सचिव पद पर पदोन्नत हुए हैं। इसके अलावा लोक स्वास्थ्य विभाग में कार्यपालन यंत्री रहे हैं। बाथम सीहोर के धोबी न होने के बावजूद हरिजन होने का प्रमाणपत्र लेकर नौकरी पा गए। सीहोर में धोबी समाज को हरिजन माना गया है। जबकि बाथम महू इंदौर के निवासी थे।


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